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EK DARPAN

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चारो - धाम में .....कोहराम!!!!

Posted On: 20 Jun, 2013 Others,न्यूज़ बर्थ में

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सभी की साँसे अटकी हुई थी.रुक-रुक कर बारिस हो रही थी…मेरे बड़े भाई साहब से दिनांक 15 जून , को जब मोबाइल पर,रात दस बजे बात हुई कि…वे लोग बद्री नाथ के लिए आगे बढ़ रहे थे ,लेकिन बारिस की वजह से ….पहाड़ दरकने के कारण ,जोशी-मठ और आगे का रास्ता बंद हो गया है……..’अतः आज रात जोशी मठ से सात कि.मी.पहले ही,एक लाज में रात गुजारनी पड़ रही है.लाज छोटा है और 12 ,लोग साथ में हैं.आगे पूरा जाम है.’ भाई साहब ने बताया….. सामान्य दिनों में भी लोग ,रात होने पर जोशी-मठ में ही रुकना पसंद करते हैं,क्योंकि बद्री-नाथ के लिए …सुबह छः बजे से ..गेट(रास्ता) मिलता है ,और लगभग 25 कि.मी.,का रास्ता तय करने के पहले ,काफी समय तक रुकना पड़ता है.किसी तरह से रात बीती,लेकिन सुबह भी रास्ता खुलने की कोई उम्मीद नहीं हुई, और यह ज्ञात हुआ की भारी बारिश के और जगह-जगह भू-स्खलन के कारण ,इसमें चौबीस घंटे भी लग सकते हैं तो उन लोगों ने वापसी का मन बना लिया ,वहीँ से बद्री नाथ को प्रणाम किये और वापस हो लिए.मेरे ताऊ जी के दोनो बड़े बेटे,भाभी लोग और उन लोगों के मित्र-गण और उनके परिवार,कुल मिलाकर तेरह लोग.सभी लोग एक ही वाहन में थे. चारो-धाम की यात्रा पर,बनारस से 5 जून को निकले थे.सभी लोग 6 जून को हरिद्वार में रुके.गंगा नहाये, दर्शन-पूजन किये.
सात जून को एक ही मिनी-बस से यमुनोत्री की यात्रा पर निकले.यमुनोत्री के ,कुछ पूर्व लोगों ने रात्रि-विश्राम किया और अगले दिन यमुनोत्री में दर्शन -पूजन के बाद होटल में वापस आये .तब भी कुछ बूंदा -बादी हो रही थी.अगले दिन गंगोत्री के लिए चल पड़े.काफी रात हो गयी थी,गंगोत्री के पहले ही रुकना पड़ा.अतः अगले दिन वहां स्नान और दर्शन हुआ.बरसात पीछा नहीं छोड़ रही थी.रस्ते में उन लोगों ने एक वाहन को फिसल कर नदी में गिरते हुए देखा.सबके रोंगटे खड़े हो गए . अगले दिन केदार-नाथ जी की यात्रा प्रारंभ हुई.रस्ते में रुकते -रुकाते गौरी-कुंड पहुँच गए. उन लोगों को यह जानकारी हुई कि …गंगनानी,गंगोत्री के पास , में जिस लाज में रुके थे ,वह जल-समाधि ले चुका था,ईश्वर को लोगों ने याद किया . आँखों के सामने …सारा दृश्य कल्पना में,एक बार घूम गया ….और लोग सिहर उठे.गौरी-कुंड में स्नान -ध्यान करके लोग आगे बढे.चूँकि रास्ता कठिन था ,और सभी लोग थक कर चूर हो चुके थे,अतः कुछ महिलाएं घोड़े से गयीं.सीतापुर में ,होटल से निकलने में विलम्ब हो गया था.दो परिवार के ,चार लोग ,डाक्टर की सलाह पर,हेलीकाप्टर से जाने की सोचे.केदार धाम की चौदह कि.मी. की पैदल यात्रा ,बहुत ही कठिन होती है.कम से कम आठ घंटे लगते ही हैं.रस्ते में भींगना ही पड़ता है,क्योंकि मूसलाधार बारिश का होना लगभग तय ही रहता है.हेलीकाप्टर वाले लोग ,दस हज़ार रूपये में ब्लैक में टिकट खरीद कर भी यात्रा नहीं कर सके,क्योंकि जब ये लोग ..फाटा…पहुंचे तो हेलीकाप्टर ने दो बार उड़ान भरा और दोनों ही बार ,भारी बारिश के चलते ,साफ़ दिखाई न पड़ने के कारण ,उसे वापस आना पडा.किसी का मोबाईल काम नहीं कर रहा था,लोग रस्ते में भीगते जा रहे थे.मन बहुत घबड़ा रहा था.मैंने रात में ग्यारह बजे (कैलिफोर्निया के साढ़े दस बजे दिन ),केदार नाथ जी के पुरोहित को फोन लगाया.संयोग से उनका फोन मिला ,उन्होंने बताया कि उनसे भी बात नहीं हो पा रही है.आते ही आप को सूचित कर देंगे.किसी तरह से अगले दिन चौदह को दर्शन करके लोग बाहर निकले थे,उसी समय हमारी बात हुई.
दर्शन करके लोग बहुत ही प्रसन्न थे.उन लोगों को क्या पता था कि जहाँ आज ,वह लोग लोग ,दर्शन करके अपने को धन्य मान रहे हैं ,वहां दो दिन बाद ही क्या होने वाला है?जल्दी-जल्दी यह लोग भोलेनाथ और पंडित जी को प्रणाम किये और वापस निकल पड़े.

पूरी तरह से गुलज़ार ,जिस मंदिर को ,दुकानों को,धर्मशालाओं को तथा रामबाड़ा जैसे भीड़-भाड़ वाले स्थान ,को पीछे छोड़कर वह लोग वापस आ रहे हैं ,वहां कल सन्नाटा पसर जायेगा,कभी सपने में नहीं सोचा था ,उन लोगों ने.चौदह-पंद्रह को रुक-रुक कर होने वाली बारिश ने १६ जून को रात में ….केदार-धाम में जो कहर बरपाया है,उसे सुनकर ही रोंगटे खड़े हो गए.उस रात में, एक जोरदार धमाका सुनाई पड़ा,और कुछ सोचने और धर्मशालाओं से बाहर निकलने के पहले ही पानी और मलबों का एक सैलाब आकर मंदिर के चबूतरे से टकराया और दो भागों में बंटकर मंदिर के चारो तरफ पड़ने वाले सभी,भवनों ,दुकानों और इंसानों को बहा ले गया. .बिजली ,पानी का अकाल पड़ गया.संचार -व्यवस्था ठप हो गयी .बचाए गए लोगों ने ,चैनलों पर जो जानकारी दी है,उसे सुनकर,ही मन पीड़ा से भर गया.केवल बारह घंटे के भीतर दोबारा आये सैलाब ने बची -खुची चीजों को अपने नीचे दबा लिया .जो लोग रात में भैरो पहाड़ी पर भाग कर छुपे थे वह बच गए.बचाने गए सेना तथा पुलिस के कुछ जवानभी लापता हैं.भारत सेवा आश्रम में तीन सौ लोग ठहरे थे ,उनकी खोज जारी है. केवल केदार नाथ में ही नहीं पूरे उत्तरा खंड और चारो-धाम में कोहराम मच गया.मुझे केदार-धाम सहित चारो-धाम जाने का सौभाग्य प्राप्त हो चुका है.जो मैंने आठ साल पहले देखा था, केवल उसी को ध्यान रखा जाय तो केवल केदार-धाम में मरने वालो की संख्या बताये जा रही संख्या से कई गुना होगी,अन्य धामों की तो बात ही छोड़िये .हमारे पंडित जी का भी मकान नहीं बचा होगा,जो बगल में ही था.बचा है तो केवल…..केदार नाथ मंदिर…और कुछ दूरस्थ भवन.इसे केदार नाथ जी की महिमा कही जाय या और कुछ?
रास्ते में फंसे लोगो की व्यथा भी असहनीय है.सबसे बड़े दुःख की बात तो यह है कि कुछ संवेदन हीन लोग तो सहायता करने की जगह ,पानी ,चाय और खाद्य-सामग्री में भी लाभ कमाने लगे.धिक्कार! है ऐसे व्यवसायिओं को.जिस समय मेरे भाई एवं अन्य लोग वापस आ रहे थे ,रूद्र-प्रयाग में ही उन्हें रात में रुकना पड़ा,क्योंकि वहां से आगे श्रीनगर एवं ऋषिकेश-मार्ग भी बंद था.होटल वाले …फुल..का बोर्ड लगा कर एक-एक कमरे पांच से छः हज़ार रूपये देने पर बोर्ड हटा लेते थे.किसी तरह से ,बिना खाए-पिये ,तेरह आदमियों को दो कमरे में रात बितानी पड़ी.रात में ,नदियों से …तेज़ बहाव की भयानक आवाज़!,डर के मारे नींद नहीं आई.
वाहन-चालक दीपक ने पता लगाया कि श्रीनगर का रास्ता साफ़ हो गया.चालक ने श्रीनगर-कोटद्वार रास्ता पकड़ लिया…..लगा कि अब जान बच जायेगी.भूख-प्यास से हालत ख़राब.रास्ते में कुछ खाने को मिला.लेकिन हरिद्वार से ३० कि.मी.पहले सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया.रात वाहन में ही गुजारनी पड़ी….बाद में ज्ञात हुआ कि जहाँ यह लोग ठहरे थे रूद्र-प्रयाग में ,संगम के किनारे का वह मकान भी 73 मकानों के साथ बह गया.जैसे मौत के मुंह से बचते चले आये हों.
अगले दिन 18 तारीख को दस बजे लोग हरिद्वार पहुंचे ,तो मालूम पड़ा कि …..परमार्थ आश्रम ..में पानी भर गया है, जहाँ ठहरना था ,लेकिन वहाँ पहुँचने पर …राहत मिली ,जब मालूम हुआ कि ….परमार्थ-निकेतन में पानी भर गया था.आज लोग ट्रेन में हैं.पंडित जी का फोन अब भी नहीं मिल रहा है.,केदार नाथ से बचाए गए लोगों की सूची में उनके भाई का नाम है.हम लोग यही प्रार्थना कर रहे हैं कि…..बाबा केदार नाथ उनके साथ ही अपने सभी भक्तों की रक्षा करें.
जो भी हो,आज चारो-धाम सहित पूरे उत्तराखंड में कोहराम मचा हुआ है.प्रधान-मंत्री ने एक हज़ार करोड़ ,अखिलेश यादव ने 25 करोड़ ,महाराष्ट्र और दिल्ली ने 10 -10 करोड़ ,एम.पी.के मुख्य-मंत्री ने पांच करोड़ और हिन्दुओं के नेता बनने का दंभ भरने वाले …..नरेन्द्र मोदी ने …केवल दो करोड़ की सहायता देने की घोषणा की है.सवाल इसका नहीं है कि कौन कितनी सहायता दे रहा है?सवाल यह है कि कौन कितना शीघ्र सहायता पहुंचाता है ,और कितनी शीघ्रता से फंसे हजारों लोगों की जान बचायी जाती है.
जय हिन्द! जय भारत!!

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 29, 2013

प्रिय ओउम जी आप के नजदीकी सब कुशल मंगल लौट आये जानकार मन ख़ुशी हुआ काश सब के बिछड़े लोग मिल जाएँ मिल पाते …प्रकृति से छेड़खानी उसे नजरअंदाज करना नदियों में नदियों से लटके घर बना लेना चारों तरफ काट काट सड़कें बनाना बड़ा घातक हो रहा है प्रभु खैर करें सारगर्भित गाथा और लेख के लिए आभार भ्रमर ५

    omdikshit के द्वारा
    June 30, 2013

    आदरणीय भ्रमर जी,नमस्कार. शुभ-कामना के लिए धन्यबाद.हमारी भी प्रभु से यही प्रार्थना है की जैसे हमारे लोगों को बचा लिया वैसे ही सभी के परिजन मिल जाय.

manoranjanthakur के द्वारा
June 29, 2013

दिल को धरका गई …जीबंत पोस्ट ….सार्थक ….शेयर करने के लिए आभार ..बधाई

    omdikshit के द्वारा
    June 29, 2013

    मनोरंजन जी,नमस्कार. बधाई के लिए,आप को बहुत-बहुत धन्यबाद.

sudhajaiswal के द्वारा
June 28, 2013

आदरणीय ॐ जी, आपके परिवार के लोग सकुशल लौट आये ये ईश्वर की कृपा ही कही जाएगी, ऐसे हालात के लिए सरकार के साथ वो तमाम लोग भी जिम्मेदार हैं जो भौगोलिक स्थिति को नजरंदाज करके विकास के नाम पर व्यापार करते हैं |

    omdikshit के द्वारा
    June 28, 2013

    आदरणीया सुधा जी, नमस्कार. शुभकामना के लिए धन्यबाद.आप ने सही कहा .अंधाधुंध ,पहाड़ों को तोड़कर ,वहां के भूगोल को चौपट किया जाता है तो वह भी लोगों के इतिहास बिगाड़ देता है.


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