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EK DARPAN

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'बदलाव'....भी ....."एक सोच है" (जागरण जंक्शन फोरम )

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2014 के लोक सभा चुनाव अपने अंतिम चरण में है.सभी दलों के नेता अपने लच्छेदार भाषणों से जनता को गुमराह करने में लगे हुए हैं.सपा के नेता तो सारी हदें पार कर जाने में लगे हैं.जैसे -जैसे…….. ‘नेता जी ‘…को अपने ‘पी.एम.’ बनने के सपने चूर होते नज़र आने लगे हैं ,नेता जी तथा उनके सिपह-सालार भी बौखलाने लगे हैं.नेता जी को अपनी धोती का पिछोटा खुलता नज़र आने लगा ….तो उन्होंने …मायावती को…….’श्रीमती या कुमारी अथवा सुश्री ‘ के सम्बोधन में ,अनजाने में नहीं ,जानबूझ कर , भ्रम की स्थिति का हवाला दे दिया.अखिलेश यादव ने मायावती को ‘बुआ’कह कर ,और भ्रम की स्थिति पैदा कर दिया .शायद यह …उनकी सोच का बदलाव है.लेकिन नेता जी ने तो महिलाओं के साथ बलात्कार के दोषियों ….को बहुत सस्ते में निपटाने की बात कह दिया.नेता जी के…,’सोच में बदलाव’,के पीछे शायद यह धारणा है कि …..”लड़के हैं…..मन…. बहक…. ही जाता है तो क्या फँसी दे दोगे ?” साथ ही उन्हें पूर्ण विश्वास है कि …..उनके शासन में ऐसे बलात्कारियों की संख्या में भारी इज़ाफ़ा होगा और बाहुबलियों,अपराधियों के साथ मिलकर उनके वोट बैंक में भी वृद्धि हो जाएगी.आज़म और आज़मी ( अबू) में केवल नुख़्ते का हेर-फेर है.शायद इसीलिए विचार एवं लफ़्फ़ाज़ भी मिलते-जुलते हैं.कोई मुस्लिमों की अनदेखी की बात करके बरगलाता है ,तो कोई ….सपा को वोट न देने वाले मुस्लिमों को …सच्चा मुसलमान न मानते हुए डी.एन.ए. टेस्ट करने की बात करता है.शायद! उन्हें भारतीय मुसलमानों के इतिहास का ज्ञान नहीं है.आज़म साहब तो चुनाव-आयोग को ही ललकारने में लगे हैं.आम आदमी पार्टी ने तो यहाँ तक कह दिया कि…’कांग्रेस और भाजपा को वोट देने वाले “देश-द्रोही”हैं.बेनी बाबू तो होश में ही नहीं हैं.

भाजपा के नेता तो एक कदम और आगे बढ़ गए हैं .भाजपा के विरोधियों को पाकिस्तान भेजने की बात करते हैं.मुख्य मुद्दे से भटकाने के लिए …केवल वाड्रा-वाड्रा करते हैं.यद्यपि गिरिराज किशोर के विरुद्ध जारी वारंट को निरस्त कर दिया है,लेकिन मुकदमा तो चलता रहेगा.उमा भारती ने अभी अमृता रायऔर दिग्विजय सिंह के व्यक्तिगत रिश्तो पर जो कटाक्ष किया है,शायद उन्हें अपनी बात भूल गयी है? मोदी खुद भी केवल सोनिया ,शहज़ादे और वाड्रा -वाड्रा करते हैं, लेकिन अडानी के मामले में चुप्पी साधे रहते हैं.सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि……वाड्रा न तो नेता हैं और न हि किसी सदन के सदस्य.यदि वाड्रा ..’भ्रष्टाचारी’ हैं तो उनके विरुद्ध जेटली जी और रविशंकर प्रसाद जी, जो लोग सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भी हैं,पी.आई.एल. क्यों नहीं दाखिल करते? इससे बेचारे ….एम.एल.शर्मा जी,एडवोकेट को भी कुछ राहत मिलेगी ,जिनके पास केवल यही काम है.मैं वाड्रा का समर्थन नहीं करता ,लेकिन क्या प्रधान मंत्री या किसी नेता का कोई रिश्तेदार ,व्यापार नहीं कर सकता?क्या राजनीति में नेताओ का पूरा कुनबा नहीं उतरता ?क्या व्यापारी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं?क्या भाजपा या अन्य दलों के शीर्षस्थ नेताओं के बेटे, दामाद व्यापारी नहीं हैं?और कौन सा ऐसा व्यापारी है जो लाभ न कमाकर केवल समाज-सेवा करता हो?क्या किसी नेता ने अम्बानी ,टाटा ,बिरला अडानी,सहारा ,मुंजाल तथा अन्य बड़े व्यापारियों के व्यापार की अवधि से उनके कुल परिसम्पत्तियों में भाग देकर जानने का प्रयास किया है कि प्रति-वर्ष कुल इज़ाफ़ा उनकी परिसम्पत्तियों का हुआ है?जो भी कारोबारी या नेता है वह अपने को ईमानदार साबित करने में लगा हुआ है.सही बात तो यह कि……जो पकड़ा जाय,वही चोर है.इसमें कोई दो राय नहीं है कि वाड्रा को अवश्य ही कुछ सुविधाएँ प्राप्त हुई होंगी,लेकिन यह तो हर सक्षम व्यक्ति करता है.क्या आम आदमी पार्टी के साथ व्यापारियों का समूह नहीं है?क्या भाजपा के अस्सी प्रतिशत समर्थक व्यापारियों से ताल्लुक नहीं रखते?उनका तो मुख्य जनाधार ही व्यापारियों और आर.यस.यस.पर निर्भर है.आप अपने आस-पास के व्यापारियों को देख ले ,जिनकी चल गयी है,उनमें से अधिकांश की परिसम्पत्तियों में दिन दूना और रात चौगुना वृद्धि क्या मंदिर में घंटा बजाने से हो रही है?एक बात तो स्पष्ट है कि इस चुनाव में जो कुछ हो रहा है,उससे नेताओं के नैतिक-पतन के घटिया स्तर का पता चलता है.व्यक्तिगत हमले भी तेज़ हो गए हैं.यह जान बूझ कर भी किया जा रहा है ताकि लोग इनसे ध्यान हटाकर…दूसरों की तरफ देखने को मज़बूर हो जायँ.लोगों को भ्रमित कर दिया जाय और जनता ने असमंजस की स्थिति में ही उन्हें वोट दे दिया हो या दे दें.देश ने आज के विरोधियों की सत्ता भी देखा है,और भुगता भी है.कहीं कोई ‘रामराज’ या ‘स्वराज’ नहीं आने वाला है.गुजरात के दूसरे पहलुओं को भी देखना चाहिए.

आज लगभग सभी दलों में 25 %से 48 % तक अपराधी चुनाव लड़ रहे हैं.उसके बाद सेवा-निवृत्त या भ्रष्ट अधिकारियो को टिकट दिया गया है.ईमानदार तो नगण्य हैं ,जो हैं भी उन्हें जाति और धर्म के आधार पर ही वोट मिलेगा.अतः उनके जीतने की सम्भावना भी क्षीण ही होगी.वाराणसी में रहने के कारण रोज़ ही जाति के प्रतिशत का ज्ञान अख़बारों से होता रहता है.यहाँ मोदी को हराने के लिए सभी दुश्मन ,अपराधी और एक-दूसरे के कट्टर वरोधी नेता गले मिल रहे हैं.कितने आये और कितने आने वाले हैं,अनुमान लगाना कठिन है.,आप’का तो एक ही लक्ष्य है…..मोदी को हराना.वैसे भी इन्हें दूसरों का खेल बिगाड़ने में महारत हासिल है.सब्ज़-बाग़ दिखाकर भाग लेते हैं.आखिर इस देश का भविष्य क्या होगा ,कुछ भी कहना संभव नहीं है.खैर …’गया ढेर दिन बाकी है थोर दिन’.एक कहावत है….’नाऊ भाई सर पर कितने बाल? बाबू ..तुम्हरे आगे ही आने वाला है.’
राहुल और सोनिया जी ने शायद यह नहीं सोचा होगा कि उन्हें चुनाव जितने के लिए इतना परिश्रम भी करना पड़ेगा.उनकी आक्रात्मकता बहुत विलम्ब से देखने को मिली है.अपने कार्यों को जनता को समझाने में और लाभ पहुँचाने में, बहुत देर कर दिया…….अब तो यही याद आता है……….’सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या हुआ?’ …….बहुत देर कर दी..(.बबुआ ..)….आते-आते’….अब तो सारा खेत चिड़ियों ने चुग लिया..उनके यह कहने का कि ……’कांग्रेस एक सोच है’का असर अब जनता पर नहीं पड़ने वाला है.महंगाई और भ्रष्टाचार से परेशान जनता को इसका हल ढूँढना ही होगा. जनता जब त्रस्त होती है तो बदलाव की सोचने को मज़बूर हो जाती है.अब तो ऐसा लगता है कि……कांग्रेस नहीं……’बदलाव ही एक सोच है’
जनता को बहुत निराश होने की भी ज़रुरत नहीं है.जब उज्ज्वला शर्मा जी को बिन फेरे ,दूसरा ‘पति’ मिल सकता है,तो जनता को भी कोई न कोई ‘परमेश्वर’ ,अवश्य ही मिलेगा ,….देर से ही सही.”B +”

जय हिन्द! जय भारत!!

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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Dubey के द्वारा
May 12, 2014

नेताओ की बेशर्मी और नैतिकता विहीन आचरण समाज के लिए चिंतनीय है. बेशर्मी से कुछ भी बोल देना इनके लिए छोटी बात है.

    OM DIKSHIT के द्वारा
    May 24, 2014

    आदरणीय दूबे जी,प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद.


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